Sep 14, 2011

हर तरह का पब्लिक है ! (पटना ४)

 

गाँधी मैदान !... गाँधी मैदान !... गाँधी मैदान !

‘गाँधी मैदान हैं ?’ एक ऑटो वाले ने बिल्कुल सामने ऑटो खड़ा करते हुए पूछा.

स्टेसन !... स्टेसन !... स्टेसन !

‘जक्सन हैं?’ एक दूसरे ऑटो वाले ने मेरे और पहले से खड़े ऑटो के बीच में बची जगह में अपना ऑटो फिट करते हुए पूछा.

मुझे एक पुराने शिक्षक याद आये. जब वो अटेंडेंस लेते और कुछ बच्चे उन्हें ‘यस सर’ की जगह ‘यस मैडम’ कह देते तो वो अटेंडेंस लेना बीच में ही रोककर मुस्कुराते हुए बड़े प्यार से पूछते ‘ए जी, आपको हमारी मूंछ नहीं दिखती है?’. मेरा अक्सर वैसे ही ऑटो वालों से पूछने का मन होता है… एक अच्छा ख़ासा इंसान जंक्शन और (या) मैदान कैसे हो सकता है !

इतना घुसकर पूछने की क्या जरुरत? जिसे जाना हो वो खुद ही आएगा. लेकिन बात ऐसी है नहीं. इस मामले में पटना में कुछ लोग गजब हैं - ऑटो वाले पूछते रहते हैं और लोग चुप ! बिल्कुल उदासीन ! निशब्द ! चेहरे पर कोई भाव नहीं. हाथों से भी कोई संकेत नहीं. कुछ उसी उदासीन भाव में इधर उधर ताकते हुए बिना कोई संकेत दिए आहिस्ते से आकर बैठ भी जाते हैं. ऑटो वाले चिल्लाने और पूछने के अलावा करें भी तो क्या करें. बड़ा कठिन है ये अनुमान लगा पाना कि किसे जाना है किसे नहीं. बेचारे शेयरधारक और भारतीय क्रिकेट फैन्स की तरह आस लगाये रहते हैं शायद इनमें से कोई चल जाए. और ठीकAuto-in-Patna उसी तरह कभी-कभी कोई चल देता है. कभी सभी चल जाते हैं तो कभी कोई नहीं. वो भी चल जाते हैं जिनसे कोई आस ही नहीं होती.

‘नींद में रहता है’ – मुझे ऑटो वाले ने बताया.

‘सब तरह का पब्लिक है. कुछ तो कभी नहीं बोलेगा. आप केतनोहू पूछ लीजिए उ बोलबे नहीं करेगा, जाना होगा तपर भी नहीं. आ कुछ अईसा पब्लिक भी है जो अभी गलिये में रहता है त हाथ हीला देगा कि नहीं जाना है… उसीमें से कुछ किनारे पर बईठ गया त अंदरे नहीं जाएगा. उसको हवा खाते हुए ही जाना है. सवारी आयेगा त पैर टेढा कर लेगा लेकिन उ भीतर नहीं जाएगा. …सब तरह का पब्लिक है. अब लेडिस सवारी आये तो कुछ लोग आगे नहीं आता है…. उ पीछे ही बैठेगा आगे ऐबे नहीं करेगा. …कई बार त हमलोग को सवारी छोड़ना पड़ता है. लेकिन अब वईसा आदमी भी हए जो लेडिस देखके खुदे उतर जाता है. मान लीजिए कि आपके घर में भी बहन हैं त आप चाहियेगा कि उसको आगे बैठना पड़े… आ ई पुलिसवन सब त ताकते रहता है कि कौन टेम्पू में आगे पसेंजर नहीं बईठा है. आके बइठ जाएगा. ना टरेन में पईसा देता है ना टेम्पो में… बसवा वलन सब तो ले लेता है. स्टाफ हैं तो का भारा नहीं देगा?’

‘आपलोगों को भी मांग लेना चाहिए’ – मैंने कहा.

‘अरे नहीं सर, हम लोग को तो अईसा परेसान कर देता है कि पूछीये मत. बोल देगा कि यहाँ काहे खरा किया है. परमिट, लायसेंस, ई लाओ, उ लाओ... हेन-तेन… पचास ठो नाटक है.’

‘गांधी मैदान?… बैठिये… अरे आइये ना महाराज. केतना तो जगह है. आगे-पीछे हो जाइए थोडा-थोडा.’ एक सवारी बैठाने के बात वार्ता आगे बढ़ी:

‘अब आपसे बात हो रहा है तो बता रहे हैं. एक ठो अऊर बात है. पहिले लईका सब रंगबाजी करता था तब तक ठीक था. … मान लीजिए हम भी कम से कम दु बात बोलते तो थे. लेकिन दू साल से जो ई लैकियन सब रंगबाजी कर रही है तो कुछो नहीं कर पाते हैं… एक बार उसको बस बोलना है कि कईसा बतमीज है रे टेम्पू वाला… इतना बोला कि उसके लिए १० ठो लफुआ तैयार खड़ा है. …अभी पाँच ठो लड़की गया मेरा टेम्पो में… आगे-पीछे करके बैठ गयी सब…  मोरया लोक उतर के बोलता है कि तीन सीट है त उसी का न भारा देंगे. हम बोले कि टरेन में जाइयेगा आपलोग खरा होके तो कए सीट का भारा दीजियेगा?... एतने में मोटरसाइकिल होएँ होएँ करते चार ठो आ गया. ‘क्या हुआ - क्या हुआ?’ …हम उहो पन्द्रह रूपया लौटा दिए. बोले कि लो तुमसे वसूलने वाला ले लेगा’.

‘उन्होंने पन्द्रह रुपये वापस ले लिए?’ – मैंने बीच में ही पूछा.

‘हाँ नहीं त. पर ई तो कुच्छो नहीं है. पहिले तो पूजा में हजार दो हजार चंदा ले लेता था लड़का सब. दस जगह रंगदारी तो हम भरते थे. पान खा लेगा आ लाल गमछा… बोलेगा ‘ऐ रोकअ तनी, पूल के ठेका हुआ है अपना’. अब दीजिए उसको दस-बीस. आ उसी में बोल दीजिए कि नहीं देंगे त… ‘ए खोल ले रे चाका’. उसमें ऐसा है कि प्रसासन का भी त हिस्सा होता था’ उसने आवाज धीरे करते हुए कहा.

‘उ देख रहे हैं न वहीँ पर सुलभ सौचालय के पीछे बैठ के पूलिसवन सब दारु पीता था. अब प्रसासन थोडा टाईट हुआ है… नितीस कुमार के बाद ई सब तो खतम हो गया… बस ई एसी बसवन के आने से थोडा मार्केट डाउन हुआ है. लेकिन उसमें कहीं से कहीं जाइए पन्द्रहे रूपया भारा है. तो छोटा रूट पर हम लोग का ठीक रहेगा’

‘पूरे दिन कोई चलते रहा तो भी?’ – एक दूसरे यात्री ने पूछा.

‘अरे नहीं महाराज तब त खटीये ठाड़ा हो जाएगा. जब उतारियेगा तब टिकटवा लेके फार देता है. वइसे दो हजार बारह से हमलोग का अच्छा कमाई होगा. भारा दोबरी हो रहा है’

‘दोबरी?’ 

‘हाँ. लेकिन खाली तीने ठो सवारी बैठेगा’

तब तक मैं गाँधी मैदान पहुँच चूका था. जैसे ही उतर कर आगे बढ़ा एक ऑटो वाले ने पूछा ‘आइये, जक्सन हैं?’ मैंने कहा ‘नहीं भैया अब कहीं नहीं जाना है’ और आगे बढ़ गया...

…हर तरह का पब्लिक है !

 

~Abhishek Ojha~

जा बढ़ा के ! वाया:  पटना १, पटना २, पटना ३

Sep 1, 2011

सरभरवा त डाउन होइबे करेगा (पटना ३)


करीब २ साल पहले एक नयी कंपनी ने मोबाईल के इस्तेमाल से पैसा भेजने का काम चालू किया था. इस सेवा के अंतर्गत कंपनी के किसी भी ग्राहक सेवा केन्द्र से भारत के किसी भी बैंक खाते में पैसा जमा किया जा सकता है. ग्राहक सेवा केन्द्र अक्सर छोटी दुकानों में होता है जैसे: किराने की दुकान, पान की दुकान, मोबाईल रिचार्ज कूपन बेचने वाले इत्यादि. पैसा ट्रांसफर करने के लिए ग्राहक सेवा केंद्र वाले अपने मोबाईल से बस एक मैसेज भेजते हैं और फिर पैसा भेजने वाले, पाने वाले और ग्राहक सेवा केन्द्र तीनों के मोबाईल पर इस लेनदेन की पुष्टि के लिए मैसेज आ जाते है.  इस मोबाईल बैंकिंग का इस्तेमाल माइक्रोफाइनांस लोन के किस्त जमा कराने के लिए भी किया जा सकता है. जिसका आजकल परीक्षण चल रहा है. 

पिछले दिनों इसी सिलसिले में गुप्ताजी से मिलना हुआ. गुप्ताजी १९९३ से पटना में दैनि़क इस्तेमाल के चीजों की एक छोटी सी दुकान चला रहे हैं. उनकी दूकान मोबाईल बैंकिंग का एक ग्राहक सेवा केन्द्र भी है. गुप्ताजी के दूकान-कम-रेसीडेंस में हुई बातचीत का अंश पढ़ा जाय Smile

‘अभी ये जो पेमेंट आया उसको आपने प्रोसेस तो किया नहीं?’ - मैंने गुप्ताजी को एक नोटबुक में लिखते हुए देख पूछ लिया.
‘अभी सरभर डाउन है'
‘ओह! कब तक डाउन रहेगा?’IMG-20110825-00307
‘अब उ तो दू मिनट में भी चालु हो सकता है आ दू घंटा भी लग सकता है'
‘जनरली कितने टाइम मे ठीक हो जाता है?’
‘अभी त बताए आपको - कवनो ठीक नहीं है कब चलेगा’
‘अगर सर्वर पूरे दिन डाउन रहे तब क्या होता है ?’
‘आप ही बताइए जब सरभरवे डाउन रहेगा तो हम का कर सकते हैं? लिख के रख लेते हैं आ जब चालु होता है तब जामा करा देते हैं’
‘मान लीजिए कि सर्वर बहुत देर तक डाउन रहा और बाद में आपने कह दिया कि आपके पास कोई पेमेंट ही नहीं आया तब?’ ऑपरेशनल सवाल पूछना जरूर था.

‘देखिये हम हियाँ १९९३ से दूकान चला रहे हैं आ जिनके यहाँ खाते हैं हम उनके यहाँ खाते है आ उ हमरे इहाँ खाते हैं’ - उनका जोश और आवाज मेरे सवालों की संख्या के समानुपात में बढ रहे थे. उन्हें लगा हम उनपर आरोप लगा रहे हैं.

‘वो तो ठीक है लेकिन हर कस्टमर सर्विस पॉइंट तो आपके जैसा नहीं होगा? इस समस्या का कोई उपाय नहीं है? ’ - मैंने फिर हिम्मत कर पूछा.
‘कवंची उपाय करेंगे आप सरभर डाउन होने का, आपे बताइये ?’
‘ये तो आपको पता होना चाहिए ? आपको बताया गया होगा कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। हर दिन का पेमेंट उसी दिन ल लेना है तो फिर कैसे होगा?’
‘नहीं ! कवनो उपाय कर लीजिए  सरभरवा त डाउन होइबे करेगा.’
‘लेकिन ऑपरेशनल इसु है तो कुछ तो उपाय होगा. धीरे-धीरे कुछ महीनों बाद… कोई बैकअप प्लान ?'
‘क्या होगा? आप आज आये हैं आ हम पांच साल से रोजे ई देख रहे हैं. अउर खराबे हुआ है. पहिलही ठीक था’  - मुझे बीच में ही रोककर बोले.
उनकी धर्मपत्नी बार-बार पर्दा हटाकर देख लेती कि किससे झगडा हो गया. इस बार उनसे नहीं रहा गया. बाहर आकर बोलीं: ‘का हो गया जी? काहे लराई कर रहे हैं?’

‘कुछो नहीं हुआ, अईसही बात कर रहे हैं. आप अंदर जाइए.’
‘लेकिन इसका कुछ तो उपाय होना चाहिए. जैसे सर्वर मेंटेनेंस उस समय किया जाय जब बिजनेस नहीं होता. रात को दो घंटे डाउन रहे. समय के साथ और खराब कैसे होता जा रहा है?' - मैंने फिर से प्रश्नवाचक दृष्टि से उनकी ओर देखा.

इस बार वो भड़क गए.
‘आप समझते काहे नहीं हैं? कौंची उपाय कराएँगे आप? आ काहे का मेंटेनेंस? मेंटेनेंस से क्या लेना देना ? पहिले ध्यान से मेरी बात सुनिए तब कुछ बोलियेगा. डीजल का पैसा दिया कंपनी वाला आ आपरेटरवा बेच के खा जाए तो का कीजियेगा? लाइन रहेगा नहीं. आ जनरेटर वाला डीजल बेचके पैसा खा जाता है. अब बताइये? केतना लोड लेगा सरभर? अच्छा एक बात बताइये - सरभर क्या होता है? व्हाट डू यू मीन बाई  सरभर?’

-उनकी आवाज का वोल्यूम उनकी पत्नी को फिर बाहर लाने के लिए पर्याप्त था. (‘का हो गया जी?’’)

जीवन में परीक्षा-प्रश्नपत्र के अलावा मुझसे किसी ने इससे पहले ‘व्हाट डू यू मीन बाई’ वाला सवाल किया हो - मुझे याद नहीं ! मैं थोड़ी देर के लिए सकपका गया कि कैसे समझाया जाय कि सर्वर क्या होता है. पर उसकी नौबत नहीं आई और वो खुद बोल पड़े. प्रश्न उन्होंने पूछा ही इसलिए था कि वो बता सकें.

‘बताइये ई का है?’ - अपना मोबाईल हाथ में लेते हुए उन्होंने मुझसे पूछा.
‘मोबाईल'
‘और ये  ?’ - मोबाईल का कवर खोल बैटरी  निकालते हुए उन्होंने अगला सवाल किया.
‘बैटरी'
‘हाँ तो ई जो आप मोबाईल देख रहे हैं उ होता है नेटवर्क और ई जो बैटरी है उ हुआ सरभर. अब मोबाईल चलेगा त बैटरी डाउन होगा कि नहीं ?’
‘होगा’
‘त बस ओइसेही सरभर भी डाउन होता है !’

उनकी मुद्रा, विवरण और आत्म विश्वास देख मुझे कुछ और पूछने कि हिम्मत नहीं हुई.  मेरे साथ गए लोग हंसी-मिश्रित सीरियसनेस किसी तरह मेंटेन कर पा रहे थे.

उनकी धर्मपत्नी ने फिर पूछा – ‘हुआ का है? काहे लराई झगरा कर रहे हैं?’

‘कुछो नहीं. होगा का. अईसहिये बात कर रहे हैं. चाय बनाइये आप.’

‘बात कर रहे हैं त आराम से बईठ के नहीं कर सकते !’ - उनकी धर्मपत्नी थोड़ी परेशानावस्था में अंदर चली गयीं.
 
‘आप बैठिये, चाय-वाय पीजिए’ - मेरी तरफ देखकर उन्होंने कहा. वैसे थे अभी भी भरपूर गुस्से में.

‘नहीं -नहीं चाय फिर कभी पियेंगे. थैंक यू ! सर्वर समझाने के लिए’ - आगे सवाल जवाब करने पर पिटने का डर भी था. तो हम मुस्कुराते हुए निकलने का रास्ता देखने लगे.

‘उ का है कि हम कभी-कभी थोडा समझाने में जोसिया जाते हैं, बुरा मत मानियेगा… बईठीये ना… हमारा घर भी इसी में है. चाय बनवाते हैं… पी के जाइयेगा. और ई हमारी धर्मपत्नी हैं…. बचपन से ही उ का है कि हम जादे पढ़े तो नहीं लेकिन जब समझाने का बात आता है तो हम अइसा समझा देते है कि….’

मैं चलने को हुआ और अब गुप्ता जी धीरे-धीरे थोडा नोर्मल हो रहे थे.

…और इस तरह मुझे समझ में आया कि सर्भर क्या होता है और क्यों डाउन होता है… और आगे भी होता रहेगा ! आपसे भी कोई पूछे तो समझा दीजियेगा, डाउट की गुंजाइश नहीं बचेगी.


~Abhishek Ojha~

Aug 25, 2011

अन्ना: एक चैट लॉग - नवंबर २००६

 

अंतराग्नि २००६ के इंडिया इंस्पायर्ड इवेंट में अन्ना हजारे को मैंने १० फीट दूर से सुना था. तब शायद अन्ना का नाम भी पहली बार ही सुना था. अंतराग्नि का अंतिम दिन था और मेरा सर दर्द कर रहा था. जहाँ तक मुझे याद है मुझे कोई पकड़ कर ले गया था इस इवेंट में.

आज अपने जीमेल में ‘अन्ना’ सर्च किया तो अंतराग्नि के ठीक बाद दो दोस्तों से किये गए चैट मिल गए. ये उसी चैट का एक अंश हैं.  २००६ अंतराग्नि में नुक्कड़ नाटक और पैनल डिस्कशन दोनों में आरटीआई छाया रहा था. आरटीआई पर नुक्कड़ नाटक काफी मशहूर हुआ था जो एमटीवी के ‘क्या बात है’ पर भी आया था. बाद में उस टीम को राज कुमार संतोषी से भी प्रसंशा मिली थी. उन्होंने ये भी कहा थे कि वो कुछ अंश अपनी आने वाली फिल्म (हल्ला बोल) में इस्तेमाल करना चाहेंगे. 

उस पैनल डिस्कशन में कई लोग थे सबकी अपनी उपलब्धियां थी लेकिन अन्ना सबसे इम्प्रेसिव थे. Annaठीक इसी तरह पिछले दिनों न्यू योर्क में एक कॉन्फ्रेंस में मुझे ईला बेन ने भी बहुत प्रभावित किया था. ये वार्तालाप जब हुआ था तब अन्ना इतने प्रसिद्द नहीं थे. तब मैं फाइनल इयर का छात्र था और कुछ दोस्त जो चार साल वाले प्रोग्राम में थे, ग्रेजुएट हो गए थे. उन्हीं दोस्तों में से दो के साथ ये बात हुई थी. खतरनाक, इंट्रेस्टिंग और ‘क्या आदमी है !’ जैसे शब्द आये हैं अन्ना के लिए. बाकी बातें तो अब सबको पता है उस समय के लिए नयी थी. आप शायद उतना एन्जॉय ना कर पाएं जितना मैंने किया. फिर भी…

कुछ सेंसर कर बाकी चैट लॉग वैसे का वैसा:

चैट लॉग १:


2:45 PM me: भाई, कहाँ रहते हो आजकल?

2:49 PM Friend-beta: हाय

Friend-beta: कैसे हो?

2:50 PM me: ठीक हूँ, तुम बताओ

Friend-beta: बस मजे में हूँ

2:51 PM me: इस बार अंतराग्नि का पैनल डिस्कशन मिस कर दिया तुमने. आरटीआई पर था. बहुत ही मस्त हुआ.

2:52 PM Friend-beta: हाँ पता चला है

me: अन्ना हजारे, अरुणा रॉय, मधु भंडारी, प्रभाष जोशी, संदीप पांडे और ओ पी केजरीवाल.

2:53 PM मेरा सर दर्द कर रहा था जाने के पहले ऐसे ही जाके बैठ गया. फिर ३ घंटे तक उठाने का मन ही नहीं किया. अन्ना हजारे क्या आदमी है. सुनके लगा कि कैसे लोग गांधी को बैठ के सुनते और इंस्पायर होते होंगे.

…इरिलेवेंट कन्वर्सेसन…

2:59 PM me: वैसे तुम्हे तो पता ही होगा इन्हीं लोगों ने बहुत हद तक आरटीआई बनवाया है.

3:00 PM Friend-beta: हाँ भाई इतना तो पता है.

me: ओ पी केजरीवाल सीआईसी कमिशनर हैं.. बेचारे को बहुत गाली दी सबने. बोल रहे थे कि ये तो अच्छे आदमी हैं लेकिन सीआईसी बहुत बेकार काम कर रहा है.

3:01 PM एक मनीष कुमार भी आया था पहले जी टीवी में था अब परिवर्तन में है.

3:02 PM Friend-beta: सीआईसी का तो हिद्यातुल्ला है?

3:04 PM me: यार अब यहाँ तो केजरीवाल ही आया था clip_image001

Friend-beta: चीफ इन्फोर्मेशन कमिश्नर? वो भी होगा. ३ लोग हैं.

Friend-beta: वो क्या बोल रहा था

3:05 PM me: वो कुछ बोला ही नहीं. पहले उसे ही मोडरेट करना था. लेकिन बोला कि मैं गवर्मेंट का आदमी हूँ… यहाँ आये लोग बोलेंगे कि मुझे बोलने नहीं दिया. इसलिए संदीप पाण्डेय को मोडरेटर बना दिया.

3:06 PM Friend-beta: ओके

me: एंड में बोला कि आप लोग जो बोल रहे हैं वो सही है और ९०% केस हमारे पास गोवेंमेंट ईम्प्लोयीज और ओफिसर्स के आते हैं. जनरली प्रोमोशन से रिलेटेड. कोई पब्लिक इंटरेस्ट में केस फाइल ही नहीं करता. और सजेस्ट किया कि आप लोग गंगा एक्शन प्लान पर आरटीआई में एक अप्लिकेशन डालिए.

Friend-beta: पांडे भी आये थे.

me: हाँ

3:07 PM Friend-beta: प्रोमोशन से रिलेटेड ?

me: हाँ.  मेरा प्रोमोशन क्यों नहीं हुआ. मेरे जूनियर का कैसे हो गया. मुझे छुट्टी क्यों नहीं मिली यही सब. ये भी बोला कि आरटीआई में अमेंडमेंट आये तो आपलोग विरोध कीजिये clip_image001[1]

Friend-beta: clip_image001[2]वो तो होगा ही.

3:09 PM me: और बोला कि जब उसकी सीआईसी में पोस्टिंग हुई तो उसे खुद घर नहीं मिला था तब उसने खुद ही आरटीआई फ़ाइल करके पूछा तब उसे घर मिला clip_image001[3]

3:10 PM बाकी खूब सारी सक्सेस और स्ट्रगल की कहानियाँ सुनाई सबने.

3:15 PM Friend-beta: गंगा एक्शन प्लान में क्या हो रहा है.


5 minutes

3:20 PM me: गंगा एक्शन प्लान सुप्रीम कोर्ट के आर्डर पर बना था टू प्रोटेक्ट गंगा फ्रॉम पोल्यूशन (पता नहीं स्टेट का है या सेण्टर का)… और कानपुर में अभी तक वाटर क्लीनिंग प्लांट्स नहीं लगे. लेदर इंडस्ट्री वाले लोबी और फ्रॉड करके अभी भी गन्दा पानी डाल रहे हैं गंगा में.

Friend-beta: हाँ ये तो राजीव गाँधी के टाइम ही शुरू हुआ था. कई फेज में काम हो रहा था पर फ्रॉड तो हुआ ही है.

3:22 PM देखो अगर कुछ ठीक हो जाए तो बढ़िया है.

me: हाँ. एक मधु भंडारी भी थी अभी परिवर्तन के लिए काम करती है. रिटायर्ड आईएफएस है. पोर्चुगल की अम्बेसडर थी रिटायर्ड होने के पहले.

3:23 PM अन्ना हजारे का लेकिन जवाब नहीं है… क्या आदमी है.

Friend-beta: क्या बोला?

3:24 PM me: वो बुड्ढा ८X६ फीट का रूम, एक गद्दा, एक ओढने का, एक थाली/लोटा, और २ धोती-कुरता. ये उसकी सारी संपत्ति है. आरटीआई के लिए महारष्ट्र सर्कार से लेकर सेंटर तक…

3:26 PM बोलता है कि मैंने आडवाणी को बोला कि देखो कल तक कर दो नहीं तो मैं तुम्हारे दरवाजे पर बैठ रहा हूँ, आगे तुम्हारी मर्जी clip_image001[4]तेलगी वाला केस कोई लेके नहीं जा रहा था… इसे कहीं से डिटेल मिल गया… लेके पहुँच गया सीधे मिनिस्ट्री में. खूब सिक्यूरिटी मिली थी उसके बाद… उसी दिन सबको भगा दिया.

3:27 PM Friend-beta: खतरनाक आदमी है तब तो.

me: एक आइडियल विलेज बनाया है महाराष्ट्र में. जहाँ अभी रहता है पहले वहाँ दारु की भट्ठियां थी. बोल रहा था अब वहाँ पान भी नहीं बिकता.

3:28 PM पहले वहाँ पानी की प्रॉब्लम थी अब वहाँ से पानी बाहर जाता है. गांधीयन थोट का आदमी है. और सब कुछ किया है जीवन में.

3:29 PM २६ साल की उम्र तक आर्मी में था. बोल रहा था कि उसे नहीं पता अभी उसके घर वाले कहाँ है और घर में कौन-कौन है. सब छोड़ के उस गाँव में ही लग गया,

3:30 PM Friend-beta: कितना बुड्ढा है?

me: बोलता है कि उसके पहले दारु भी पिया है आर्मी में था तब... थोडा-बहुत छोटी-मोती मारपीट भी. तब मुंबई में फूल बेचता था.

3:31 PM १९४० टाइप का है... विवेकानंद की एक किताब पढ़ी तब से कूल हो गया.

Friend-beta: रुको मैं भी उसके बारे में कुछ पढता हूँ.

3:32 PM me: अभी एक स्कूल भी चलाता है जिसमें वो बच्चे पढते हैं जिन्हें मुंबई-पुणे जैसी जगहों के स्कूलों से निकाल दिया जाता है. या वैसे जिनका कहीं और एडमिशन नहीं होता.

Friend-beta: इंटरेस्टिंग आदमी है.

me: अरे जरुरत से ज्यादा इंटरेस्टिंग आदमी है. रुको विडियो आने दो तो भेजने का जुगाड करता हूँ. मुझे तो बहुत अच्छा लगा.

Friend-beta: ओके

me: आता हूँ थोड़ी देर में.

3:33 PM Friend-beta: ओके

बाय

मैं भी जा रहा हूँ फ्रूटी पीने, बाय.


चैट लॉग २: (इसमें अन्ना से जुड़ी बस एक ही लाइन है, लेकिन सर्च रिजल्ट में आया तो… )

12:01 PM me: हाँ बोलो

Friend-Alpha: कहाँ थे इतने दिन !!

me: अंतराग्नि. अभी सोके उठा हूँ, अभी ब्रश भी नहीं किया.

Friend-Alpha: कर के आओ

me: आता हूँ


9 minutes

12:11 PM me: मैं आ गया clip_image001[5]

Friend-Alpha: clip_image001[6]कैसी रही अंतराग्नि ?

me: अच्छी रही. मैं जिस-जिस इवेंट में गया वो तो अच्छे थे. ओपनिंग थोड़ी ठीक रही.

Friend-Alpha: सही. कोई कन्या पटाई?

12:12 PM me: नहीं यार, कन्या कहाँ…

Friend-Alpha: (एक नाम) मुझे कुछ कुछ बता रहा था तुम्हारे और (एक और नाम) के बारे में clip_image002

me: ही ही, हमने कुछ नहीं किया भाई.

12:13 PM Friend-Alpha: हाँ मुझे पता है. और सुना… कि हाल. ?

इरिलेवेंट कन्वर्सेसन

me: खैर… और बताओ

12:17 PM Friend-Alpha: बस सब ठीक

me: कल कवि सम्मेलन अच्छा हुआ.

Friend-Alpha: अच्छा? गुड. यूफोरिया कैसा था.

me: ठीक ठाक.

12:18 PM खूब इधर उधर के गाने गाये उसने. डिस्क बना दिया बाद में तो.

Friend-Alpha: अब अपने गाने इतने अच्छे नहीं होंगे तो कोई क्या करेगा.

me: और एक पैनल डिस्कशन भी था आरटीआई पर. वो भी बहुत अच्छा था.

12:19 PM Friend-Alpha: अच्छा… कूल.

me: बहुत इन्फ्लुएंसिंग स्पीकर आये थे.

Friend-Alpha: सही है

12:20 PM me: अन्ना हजारे का लेक्चर सुन कर लगा कि शायद लोग गाँधी को ऐसे ही सुन कर इन्फ्लुएंस होते होंगे. बहुत अच्छा बोला

Friend-Alpha: अच्छा… सही है.

me: बाकी डांस इवेंट्स वगैरह नोर्मल ही थे… ऋतंभरा भी ठीक था. बहुत अच्छी टीम्स नहीं थी एक चंडीगढ़ को छोड़कर.

12:21 PM Friend-Alpha: अच्छा, निफ्ट टाइप कुछ नहीं था?

me: थे ३-४ आईएनआईएफडी

12:22 PM Friend-Alpha: अच्छा. और सुनाओ… बाकी जनता कैसे है?

me: सब मस्त हैं.

…इरिलेवेंट कन्वर्सेसन…

[एसेट मैनेजमेंट, क्वांटिटेटीव जोब्स, बीसीजी, मैकेंजी, ऑयल कंपनीज, एक दोस्त की गर्लफ्रेंड, उसका ब्रेकअप … उससे जुड़ी कुछ बातें जैसे ‘इतनी जल्दी थी क्या उसे शादी की? थोड़े दिन वेट नहीं कर सकती थी.?… बुरा हुआ. अनलिमिटेड टॉक की स्कीम लिया… फिर उसने १३ रेडिफ अकाउंट बनाए थे एसेमेस करने के लिए… वैसे अभी भी ये चाहे तो वो कहीं गयी नहीं है… लेकिन बोलता है अजीब लड़की है ! …और अभी कोई उम्र है कम से कम २-४ साल तो जॉब करनी ही चाहिए. पर उस कन्या के लिए तब तक तो देर हो जायेगी. …फाईट है ! अरे नहीं… वो भी टाइम पास करता था… लोग ऐसा टाइम पास क्यों करते हैं? सीधे बता देना चाहिए जब भी बात आये कि… लुक मी टाइम पास… सो यू डोंट गेट सीरियस clip_image001[7]

फिर लंच के लिए जाने की बात हुई… मेस बंद हो जाएगा. और एक हिप्पो दोस्त की जो अब तक सो रहा था. मुझसे कहा गया ‘लंच करने मत जाओ.' प्लीज जल्दी आना क्योंकि मेरे पास आज कोई काम नहीं है clip_image001[8]‘. तकरीबन १३.४५ पर ये वार्तालाप खतम हुई थी मेस बंद होने के १५ मिनट पहले. ]


अल्फा-बीटा को मेरे कॉलेज के दोस्त आसानी से पहचान लेंगे. अंतराग्नि का ग्लैमर कैम्पस के मरुस्थल की दो बूंद हुआ करती. उसके बाद भी जिसे यही मिले बात करने को Smile  उसे पहचानना कौन सी बड़ी बात है जी.

~Abhishek Ojha~

(पटना सीरीज जारी रहेगी)