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Sep 24, 2008

कोंकण यात्रा (भाग... III)

कोंकण और पुणे के आस-पास बिताये गए कुछ सप्ताहांत की झलकियों की तीसरी कड़ी में... हरिहरेश्वर और श्रीवर्धन.

इससे पहले अलीबाग और दिवेआगर हो चुका है... दिवेआगर से श्रीवर्धन और फिर हरिहरेश्वर कुछ ३०-३५ किलोमीटर की यात्रा है. इस यात्रा की सबसे खुबसूरत बात ये है की ये लगभग पूरे समय समुद्र (अरब सागर) के किनारे-किनारे चलता है.  बस दाहिनी तरफ़ देखते रहो और खुबसूरत समुद्री नज़ारा दीखता रहता है.PICT0516 ये नजारे यात्रा को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते. बीच में मछुवारों के गाँव से गुजरते समय बस थोडी देर के लिए नज़ारा छुटता है और इसी थोडी देर में ही मछली की तीखी गंध भी नाकों में प्रवेश करती है. तटीय क्षेत्र होने के कारण मुख्य यहाँ के जीवन-यापन पर मछ्ली और नारियल का बहुत बड़ा योगदान दिखना स्वाभाविक ही है.

अगर आप धर्म में रूचि रखते है तो कुछ प्रसिद्द मन्दिर भी हैं इस क्षेत्र में.

श्रीवर्धन का समुद्रतट है तो सुंदर ! पर इस क्षेत्र के अन्य समुद्र तटों को देखने के बाद कुछ ख़ास प्रतीत नहीं होता. पर हरिहरेश्वर पहुचने के बाद चट्टान वाला तट... आपको मोहित कर लेगा. अगर आप प्राकृतिक संरचना और नजारों के शौकीन हैं तो फिर निराशा का सवाल ही नहीं उठता. हरिहरेश्वर का प्रसिद्द 'काल भैरव' शंकर भगवान् का मन्दिर है. मन्दिर के समीप प्रदक्षिणा का मार्ग बना हुआ है. PICT0571 धार्मिक भावना हो न हो अगर एक बार आप वहां तक गए हैं और इस मार्ग पर नहीं गए तो बहुत कुछ छुट जायेगा... एक तरफ़ अरब सागर और दूसरी तरफ़ लहरों से कटे-छंटे चट्टान...  प्रकृति के खुबसूरत नमूने हैं. दो खड़े चट्टानों के बीच बनी सीढी से उतरना और फिर तट तक पहुचना... अगर ज्वार का समय हो तो आप चट्टानों से टकराती हुई लहरों को भी देख सकते हैं. पर पत्थरों की संरचना भी अपने आप में बहुत खुबसूरत है. ऐसी मान्यता है की अगस्त मुनि का आश्रम यहाँ हुआ करता था.

इस मन्दिर के समीप ही महाराष्ट्र पर्यटन विभाग का रिसॉर्ट और एक अन्य खुबसूरत समुद्री तट है. यहाँ से चट्टानयुक्त और बालू दोनों के ही तट समीप ही हैं. एक-आध छोटे वाटर स्पोर्ट्स की भी व्यवस्था हैं.

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जब कुछ नहीं ... तो यात्रा वृतांत. अगली बार जब कुछ ठेलने को नहीं मिला तो कोंकण यात्रा में आगे चलेंगे... ! बड़ी मजेदार जगहें हैं.

(ये ठीक ऊपर वाली और पहली तस्वीर दिवेआगर और श्रीवर्धन के बीच के मार्ग पर ली गई थी और ऊपर से दूसरी तस्वीर हरिहरेश्वर के समुद्र के किनारे के चट्टानों की है. नीचे के ये सारे चित्र हरिहरेश्वर के हैं. )

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फिलहाल मैं कल से १५ दिनों की छुट्टी पर घर जा रहा हूँ तो तब तक के लिए इधर से भी छुट्टी !


एक पखवाडे के लिए बिलागरी बंद... बस ईमेल और फ़ोन चालु.

Feb 15, 2008

कोंकण यात्रा... (भाग I)

पिछला साल मेरे लिए कई मायनो में यादगार रहा. कुछ यात्राओं का भी इसे यादगार बनाने में योगदान रहा. आज २००७ की विदाई वाली यात्रा के कुछ चित्र और और एक छोटा सा कोंकण परिचय. पहले भाग में पश्चिमी घाट पर थोड़े कम प्रसिद्ध जगहों में से... अलिबाग, दिवेआगर, श्रीवर्धन, मुरुड और हरिहरेश्वर. कम प्रसिद्ध होने से मेरा मतलब गोवा की तुलना में है. पर अगर आप कम भीड़ और साफ सुथरी प्राकृतिक जगह की तलाश में है... तो आपको निराशा नहीं होगी. जहाँ दिवेआगर निर्विवादित रूप से कोंकण का सबसे अच्छा बालू वाला समुद्रतट है वहीं हरिहरेश्वर के चट्टानयुक्त तट की कोई तुलना नहीं है.

ज्यादा बोझिल न हो इसलिए आज का वर्णन दिवेआगर तक ही.

दिवेआगर: व्यवसायिक रूप से पर्यटन स्थल के रूप में तेजी से विकसित हो रहे इस कोंकणी गाँव में आप खूबसूरत समुद्री तट के अलावा कोंकणी मेहमानदारी का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं। रेसोर्ट्स में रहने से अच्छा है की आप किसी के घर में रुक जाएँ और वैसे भी दिवेआगर में यह एक आम प्रचलन है. अगर आप मांसाहारी हैं तो कोंकणी समुद्री भोजन का आनंद ले सकते हैं और अगर मेरी तरह शाकाहारी हैं तो भी आपके लिए बहुत कुछ मिलेगा. पर किसी के घर में रुकने के लिए आपको अग्रिम बुकिंग करनी पड़ेगी. मुम्बई और पुणे से पास होने के कारण वीकएंड पर लोग यहाँ जाना पसंद करते हैं और अगर लंबा वीकएंड हो या नव वर्ष जैसे अवसर हो तो फिर बुकिंग तो करनी ही पड़ेगी. मैंने कुछ २५-३० जगह कॉल किया होगा. अगर आप को नम्बर चाहिए तो आप मुझे सम्पर्क कर सकते हैं :-) अगर आप पुणे में रहते हैं तो चाँदनी चौक से पौड रोड होते हुए दिवेआगर पहुच सकते हैं... रास्ते में मुल्शी झील और तामिनी घाट में भी अच्छी जगहें हैं.


तामिनी घाट में एक पड़ाव


मुल्शी झील

मैं आपको एक बात की गारंटी तो दे ही सकता हूँ... आपको दिवेआगर से अच्छा समुद्रतट कोंकण क्षेत्र में नहीं मिलेगा. पूर्णिमा की रात थी और हम १२ बजे रात तक समुद्र के किनारे बैठे रहे. सबसे अच्छी बात ये थी की यहाँ अन्य पर्यटक स्थलों की तरह बोतल और प्लास्टिक नहीं दिखे... ग्रामीण परिवेश और साफ सुथरा, प्राकृतिक, दूर तक फैला हुआ समुद्र तट... इसके अलावा और क्या चाहिए छुट्टियाँ बिताने के लिए !




दिवेआगर समुद्र तट

पर इतना तो स्पष्ट हो गया की ये जगह भी जल्दी ही बाकी जगहों की तरह व्यवसायिक और प्रदूषित हो जायेगी. और जहाँ ग्रामीण परिवेश में अभी भी लोग अपनी जरुरत से ज्यादा कमाने की भावना से ग्रसित नहीं हुए हैं. वहीं शहरों की तरह यहाँ भी ऐसे लोग बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं... जो हर सामने आने वाले आदमी से ही जिंदगी भर का खर्चा निकाल लेना चाहते हैं. अगर आपको रुकने की जगह नहीं मिल रही हो और कोई रिसॉर्ट वाला वहां के स्तर से ५ गुना ज्यादा मांग लें तो आप आश्चर्य मत कीजियेगा. वैसे कुल मिला के हमारी यात्रा अच्छी रही... बाकी जगहों पे ऐसी-ऐसी समस्याएं हो जाती हैं कि ये छोटी-मोटी समस्याएं भुलाने में कोइ ज्यादा वक्ता नहीं लगा.

कैमरे कि LCD ख़राब हो जाने के कारण जैसा मैंने सोचा था उतनी अच्छी तस्वीरें तो नहीं आ पायी... फिर भी आपको कैसी लगी?


~Abhishek Ojha~